भृकुटी तनेगी नहीं
दृष्टि थकेगी नहीं
सृष्टि और प्रगति की
कदमताल जमेगी नहीं||

दुविधा उठेगी नहीं
ये व्यथा बंटेगी नहीं
जब तक इंसान की
भृकुटी तनेगी नहीं ||


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